भविष्य की चिंता से कैसे बचे – 3 आसान तरीक़े जो काम करते है

भविष्य की चिंता से कैसे बचें ? दोस्तों कभी कभी हमारी जिंदगी में एक ऐसा समय चल रहा होता है जब भविष्य की चिंताए हमें बुरी तरह घेर लेती है

हमारे मन में अपने आने बाले कल को लेकर ज्यादातर Negative Thoughts ही होते है आगे क्या होगा अगर कुछ न कर सका तो कौन लड़की मुझसे शादी करेगी

मेरे सपनों का क्या होगा कैसे में अपने घरवालों और लोगों के सामने जाऊँगा ऐसे कई सबाल और डर हमारे मन में लगातार चलते है जिनके बारे में सोच सोचकर हम अपना आज तो खराब करते ही है

साथ साथ हर समय बैचनी टूटा आत्मविश्वास और डर हमें आने बाले कल के लिए भी लगातार कमजोर करते है इसलिए हम चाहते है की हम अपनी इन चिंताओं को हमेशा के लिए खत्म कर दे

लेकिन सबाल आता है की कैसे भविष्य की चिंता से बचे ? तो दोस्तों आपके इसी सबाल के जबाब के लिए है Motivethinker का आज का ये Artical

आज के इस Artical में हम आपको भविष्य की चिंता क्या है , क्यों होती है ,और कैसे इसे जड़ से ख़त्म किया जा सकता इन सब बातों के बारे ऐसे कुछ Practical तरीके बताने बाले है

जिन्हें पढ़कर आप अपनी चिंताओं से हमेशा के लिए मुक्त हो जायेंगे तो चलिए दोस्तों बिना आपके समय लिए शुरू करते है आज का ये Artical भविष्य की चिंता से कैसे बचे ?

1 . भविष्य की चिंता क्यों होती है ?

दोस्तों भविष्य की चिंता से बचने और उसे जड़ से खत्म करने के लिए सबसे पहले हमें ये समझना जरुरी होता है की भविष्य की चिंता क्यों होती है ? क्यों हम अपने भविष्य को लेकर इतना सोचते है

क्यूंकि दोस्तों जब तक हम समस्या की पहचान न कर ले तब तक उसका कोई निश्चित समाधान हमें नहीं मिलता इसलिए सबसे पहले समझते है की आखिर भविष्य की चिंता क्यों होती है ?

1 . बीते कल की असफलताएं और खराब वर्तमान कल की चिंताओं को जन्म देता है

दोस्तों आपने इस पूरी दुनियाँ में एक भी इंसान ऐसा नहीं देखा होगा जिसके पास बहुत सारा पैसा हो और बो अपने भविष्य के लिए चिंतित हो आपने एक भी ऐसा इंसान नहीं देखा होगा जिसके पास एक सुरक्षित नौकरी हो और उसे भविष्य की चिंता सताती हो

कभी सोचा ऐसा क्यों ? क्यूंकि भविष्य की चिंता ऐसे इंसान को अपना शिकार बनाती है जो अपनी जिंदगी में करना तो बहुत कुछ चाहता है लेकिन हर बार उसे असफ़लता ही मिलती है

जिसे हर हालात में एक अच्छी नौकरी और पैसा तो चाहिए तो होता लेकिन वर्तमान में उसे ऐसा कोई रास्ता नज़र नहीं आता जिस पर चलकर बो एक सुरक्षित भविष्य को पा सकें ऐसा कोई लक्ष्य नज़र नहीं आता जिस पर मेहनत करके बो अपने सपने पूरे कर सके

दोस्तों जब ऐसी स्तिथि हमारी जिंदगी में बनती है तब हमारे मन में आने बाली जिंदगी को लेकर कई तरह के सबाल होते है की आगे क्या होगा हमें नौकरी नहीं मिली तो क्या कौन लड़की मुझसे शादी करेगी मेरी किस्मत ही खराब है

मुझ में ही कोई कमी है ऐसे कई सबाल हमारे मन में होते है जिनका का कोई जबाब हमारे पास नहीं होता और यही बो शुरूआती बिंदु होता है जँहा से हमारे मन में भविष्य के प्रति चिंताये जन्म लेनी लगती है

और जब हम इन चीजों को समझ नहीं पाते और इनका कोई समाधान नहीं कर पाते तो हम इस जाल में फसते चले जाते है कैसे चलिए समझते है

2 . ज्यादा सोचने की आदत और अतीत के अनुभव हमारी चिंताओं को बड़ा देते है

अतीत की असफ़लता और ख़राब वर्तमान की स्तिथि से जन्में मामूली विचार तब हमारी चिंताओं में बदलने लगते है जब हम उन पर लगातार सोचना शुरू कर देते है

क्यूंकि दोस्तों जब हमारे लगातार सोचने पर भी जब कोई रास्ता हमें नज़र नहीं आता तो हमारे मन में भविष्य के प्रति एक डर जन्म लेने लगता है fear of uncertainty आगे क्या होगा आगे क्या होने बाला है

इसलिए हम अपने भविष्य को लेकर कई तरह से सोचना शुरू कर देते है और हमारी यही सोच धीरे धीरे Negative होती चली जाती है क्यूंकि Negative Thoughts की तरफ हमारा दिमाग बहुत जल्दी आकर्षित होता है

जैसे मान लीजिए आपके मन में भविष्य के प्रति एक Thought आता है की मुझे नौकरी नहीं मिली तो में कुछ और कर लूंगा तो आप इतना नहीं सोचेंगे लेकिन यही Thought Negative है की अगर मुझे नौकरी नहीं मिली तो जिंदगी बर्बाद हो जाएगी

तो फिर हमारे मन में एक डर पैदा होता है यही डर हमें ज्यादा सोचने पर मज़बूर करता है और जब हम किसी चीज को लेकर लगातार सोचते है तो बो और भी Negative होती चली जाती है

क्यों ? क्यूंकि दिमाग Negative Thought को ज्यादा महत्ब देता है इसके अलाबा हमारे पास्ट के बुरे अनुभव और ख़राब वर्तमान Negative thoughts को और मजबूत बनाते है

इसलिए मामूली सोच से जन्में कुछ विचार धीरे धीरे हमारी चिंताओं में बदलने लगते है और हमारे अंदर डर और बैचेनी बढ़ने लगती है

3 . बढ़ते Self Doubt और Negative Thoughts चिंता को हमारी पहचान बना देते है

दोस्तों जब हम अपनी चिंताओं और अपने डर के चलते भविष्य को लेकर बार बार सोचते है तो हमारे मन में चलने बाले यही डर और Negative Thoughts चिंता को हमारी पहचान बनाने लगते है

जिससे हमारी सोच कुछ इस कदर हो जाती है की हम कुछ भी नहीं कर पाते क्यूंकि जैसे ही हम अपने भविष्य को लेकर सोचते है तो हमारे मन में भविष्य को लेकर डर और डाउट ही होते है

जिससे हमारी सोच ऐसी हो जाती है की नौकरी नहीं मिली तो अब कभी मिलेगी ही नहीं बार बार कुछ बुरा हुआ तो अब कुछ अच्छा होगा ही नहीं बार बार असफल हुए तो मुझ में ही कोई कमी है

ये ऐसा बक्त होता है जब चिंता हमारी पहचान बन जाती है और हमें लगता है की हम में ही कोई कमी है इसलिए हम किसी भी काम को लेकर इतना सोचते है की काम को शुरू ही नहीं कर पाते

और यही बो बक्त होता है जहाँ हमारी चिंताए हमें मानसिक और शारीरिक तौर पर नुकसान पहुंचाने लगती है और इसलिए हमारे मन एक बैचेनी और डर हमेशा बना रहता है

2 . क्या भविष्य की चिंता करनी चाहिए ?

क्या भविष्य की चिंता करनी चाहिए दोस्तों यह एक ऐसा सबाल है जो हर इंसान बार बार सोचता

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